जो गलती गांधीजी ने चंपारण ( नील आंदोलन ) में किया वहीं मोदीजी ने कल किया, और हम बिहारी गिरमिटिया तो जो हैं सो हैं ।नफरत और भक्ति किसी को भी अति ठीक नहीं, emotional fools का इस दुनिया में कद्र नहीं , पूरा लेख पढ़ के चाय बागानों से compare कर लीजिएगा ।चंपारण में 28000 से ज्यादा नील की factories थी, बोलना गैर जरूरी है की कितना रोजगार सृजन करता होगा , कितने हजार acre में खेती होती होगी ,चाय बागान में आज भी होती हैं । पहले हम अंग्रेज़ो के गुलाम थे अब एक कुरूप राजनीति के , शोषण हमारा ही हैं, ताली हम ही बजा रहे हैं !!!अंग्रेज सामंतवादी ताकत थी तो निश्चय रूप से कुछ दमनकारी practices होंगी, ये भी एक सच हैं , और नील को synthetic नील से टक्कर लेना पड़ रहा था ये भी

पर , पर पर क्या एक नेता का काम ये है की वो पूरे economy को ही बरबाद कर दे ? या उसमे जो गलतवहैं, जो दमनकारी है उसका निवारण करे, जमीन को उपजाऊ कैसे बनाए, contract कैसे तोड़े, ज्यादा दाम कैसे ले पर हुआ क्या ? सब बरबाद !!!गांधीजी ने ब्रज किशोर बाबू और पंडित शुक्ल जी के सामने स्वीकार किया था की मुझे कुछ पता नहीं हैं नील के बारे में , पर अपनी आंदोलन की सफलता में वो इतने चूर हो गए की उन्होंने कैथी में डायरी लिखने वाले शुक्ल जी को अनपढ़ या अनगढ़ तक कह दिया !!! शायद बिहारी तब भी देश हित में चुप रह गया होगा, जैसे कल से खुश हो रहा हैं ।बिहार और आज का कृषि कानून : सब देखो हममें अब कृषि कानून की बात करते हैं और नील, चाय के साथ कंपेयर भी करते हैं 1) APMC हटने से क्या होता हैं ये धान, गेहूं से सीखिए, आज की ये तानाशाह और bewakoof सरकार सिर्फ बंद करवाती हैं , बिना alternate के, और बिहारी को आत्मनिर्भर बनना पड़ता हैं ।2) private मंडी से क्या फायदे हैं ये मकई से सीखिए, अभी ethanol impact देखना बाकी हैं , शाहनवाज हुसैन का impact देखना बाकी हैं 3) कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग बिहार में बहुत से स्टार्ट अप और बड़ी कंपनीज जैसे ITC,PEPSI contract farming करवाती हैं , नील और चाय टाइप कोई समस्या सुने ?आज किसान चाहता हैं कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग 4) कभी सोचे है क्यों ज्यादा जमीन पे उन्नत खेती कर के भी हमारा प्रोडक्शन कागजों पे कम होता हैं ? क्योंकि यहां का धान, गेहुं पंजाब की मंडियों में वहां की पैदावार के रूप में बिकता हैं,हैं यहां रह के भी, अपने खेतो में काम कर के भी पंजाब की गुलामी करते हैं, और गलती उनकी नहीं हैं, हमारी है , हैं vote दे के अपने शोषणकर्ता खोजते हैं ।

कल मोदीजी ने जरूरी सुधार नहीं कर के सीधा कानून हटा दिया, जो भी उम्मीद थी खत्म, finish, bye bye ,tataनतीजा भोगने बिहारी है ही, मोदीजी चुनाव जीत गए , पंजाबी अपनी संपन्नता जीत गए, बिहार फिर हार गयाबिहारी नेता तब भी खुश था आज भी हैं, बाकी तो भीड़ हैं