सामाजिक अंकेक्षण (social audit) लोकतांत्रिक तरीका है जो निगरानी का उपकरण है, जो नागरिकों को सरकारी धन के उपयोग का ट्रैक रखने का अधिकार देता है, किसी योजना की प्रभावशीलता का आंकलन करता है… सामाजिक अंकेक्षण (social audit) बेहतर विकल्प साबित हो सकता है… इसका परिणाम न सिर्फ बालिका गृह कांड में देखने को मिला बल्कि दर्जनों उदाहरण हैं जहाँ सामाजिक अंकेक्षण (social audit) ने व्यवस्था के कई राज को बेपर्दा किया…आंध्रप्रदेश, तेलंगाना तथा मेघालय जैसे राज्यों में सोसाइटी फॉर सोशल ऑडिट एंड ट्रांसपरेंसी (SSAAT) की स्थापना की है जो स्वायत संस्था है।

राजस्थान में मजदूर किसान संगठन (MKSS) जैसी संस्था के प्रयासों ने राजस्थान राज्य में नरेगा के सोशल ऑडिट के लिये आंदोलन किया और इसी संस्था ने आगे चलकर उक्त राज्य के कुछ जिलों में नरेगा में धांधली के खिलाफ जन सुनवाई के माध्यम से सोशल ऑडिट किया…https://www.telegraphindia.com/…/keep-a…/cid/1796676Bihar Demands Social Audit, हमे नाम नहीं काम का सुशासन चाहीए, हमे नाम का नहीं सही का लोकतंत्र चाहिए